हम भी गुलाम है

गुलाम हुआ है इंसान कुछ इस कदर मोबाइल का रिश्ते मिलने को तरसते है, चाय के टेबल पर यह सच है दोस्तों कि आज कल एक छोटी सी निर्जीव वस्तु ने हम सब को अपना गुलाम बना रखा है |  हमें अपनों से इसने कब दूर कर दिया , किसी को पता ही नहीं चला […]

हम भी गुलाम है

हँसना क्यों ज़रूरी है ??

कुछ दिनों पूर्व मुझे दिल्ली जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | वैसे भी pandemic के कारण  काफी दिनों से डर डर  कर जी रहे थे | अब जब वैक्सीन मार्किट में आ गया है तो मुझे  भी हिम्मत हुई और मैंने कोलकाता से दिल्ली जाने का कार्यक्रम बना डाला | दिल्ली जाने के क्रम में […]

हँसना क्यों ज़रूरी है ??

बुढ़ापे का सुन्दर समाधान

ये ज़िन्दगी बस यूँ ही बीत जानी है आज बचपन तो कल ज़वानी है गुरुर कैसा जो जिस्म ख़ूबसूरत है बुढ़ापा भी तजुर्बे की अदद निशानी है दोस्तों, कभी कभी हमें कुछ ऐसी जानकारियाँ हाथ लगती है जिसे शेयर करने को जी चाहता है ताकि मनोरंजन के साथ साथ कुछ ज्ञान की बातें भी सिख […]

बुढ़ापे का सुन्दर समाधान

बुढ़ापे का सुन्दर समाधान

ये ज़िन्दगी बस यूँ ही बीत जानी है आज बचपन तो कल ज़वानी है गुरुर कैसा जो जिस्म ख़ूबसूरत है बुढ़ापा भी तजुर्बे की अदद निशानी है दोस्तों, कभी कभी हमें कुछ ऐसी जानकारियाँ हाथ लगती है जिसे शेयर करने को जी चाहता है ताकि मनोरंजन के साथ साथ कुछ ज्ञान की बातें भी सिख […]

बुढ़ापे का सुन्दर समाधान

स्त्री जब

एक स्त्री जब, करती है आंख मूंदकरतुम पर विश्वास, करती है सर्वस्व न्यौछावरजब टूटते हो तुम जोड़ती है प्यार करजब उखड़ते हो तुम रोकती है डांटकर सजाती है, संवारती है दुनिया तुम्हारीछिपाती है गलतियां निभाती रिश्ते तुम्हारेफिर भी तुम रौब जमाते हो , रूठते होतो मनाती है, निकालती है न्योहरे सृजन करती है हर पल […]

स्त्री जब

जो होता है अच्छे के लिए होता है।

एक बार शहंशाह अकबर (Akbar) एंव बीरबल (Birbal) शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल( Birbal ) ने कहा – “कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” अकबर( Akbar ) को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागाह में डाल दिया जाये| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागाह में डाल दिया एंव अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए|

रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए|

जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है अर्थात् वह खंडित है इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एंव वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर (Akbar) ने बीरबल को कारागाह से मुक्त किया एंव उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी जो उसने बीरबल (Birbal) जैसे ज्ञानी एंव दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा – जो भी होता है अच्छे के लिए होता है| तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है?

बीरबल ने कहा, शहंशाह अगर आप मुझे बंधी न बनाते तो में आपके साथ शिकार पर चलता और आदिवासी मेरी बली दे देते| इस तरह बीरबल की यह बात सच हुई की जो भी होता है उसका अंतिम परिणाम अच्छा ही होता है|

क्रोध के दो मिनट

एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही। पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया।

परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया। सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई।

पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया। उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी
मन से बैठा था। सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है।
मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर कोई लेने को तैयार नहीं है।

सेठ ने सोचा ‘इस देश में मैने बहुत धन कमाया है, और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !’ उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई।

उस व्यक्ति ने कहा- मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है।

सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था। लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी।

व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया- कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रूककर सोच लेना।

सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया। कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय सेठ अपने नगर को पहुँचा।
उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ ।

घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के नीचे की जमीन खिसक गई। पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक युवक सोया हुआ था।

अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और ये यहां अन्य पुरुष के साथ है। दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ। क्रोध में तलवार निकाल ली।

वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र याद आया- कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट सोच लेना। सोचने के लिए रूका।तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई।
बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई।

जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी वह ख़ुश हो गई और बोली- आपके बिना जीवन सूना सूना था।
इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले यह मैं ही जानती हूँ।

सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को देखकर कुपित था।

पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग।तेरे पिता आए हैं।

युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई। उसके लम्बे बाल बिखर गए।

सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है। पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही पालन पोषण और संस्कार दिए हैं।

यह सुनकर सेठ की आँखों से अश्रुधारा बह निकली। पत्नी और बेटी को गले लगाकर सोचने लगा कि यदि
आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता। मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता।

ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो 500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं।

‘ज्ञान तो अनमोल है ‘

इस कहानी का सार यह है कि जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर सुख की बरसात कर सकते हैं। वे हैं – ‘क्रोध के दो मिनट’