♧ पापा देखो मेंहदी वाली ♧

मुझे मेंहदी लगवानी है!

“पँद्रह साल की ‘छोटी’ बाज़ार में

बैठी मेंहदी वाली को देखते ही

मचल गयी…!!

“कैसे लगाती हो मेंहदी?”

पिता ने सवाल किया…

“एक हाथ के पचास दो के सौ…

  मेंहदी लगाने वाली ने जवाब दिया…

पिता को मालूम नहीं था कि आजकल मेंहदी लगवाना इतना मँहगा होता है.
वह बोला:
“नहीं भई एक हाथ के बीस लो

वरना हमें नहीं लगवानी.”

यह सुनकर ‘छोटी’ ने मुँह फुला लिया…!

“अरे अब चलो भी,

नहीं लगवानी इतनी महँगी मेंहदी”

पिता के माथे पर लकीरें उभर आयीं…!

“अरे लगवाने दो ना साहब…

अभी आपके घर में है तो

आपसे लाड़ भी कर सकती है…!

कल को पराए घर चली गई तो

पता नहीं फिर ऐसे मचल पाएगी या नहीं…?

तब आप भी तरसोगे बिटिया की

फरमाईश पूरी करने को…!!

मेंहदी वाली के शब्द थे तो चुभने

वाले पर उन्हें सुनकर पिता को

अपनी बड़ी बेटी की याद आ गई…!

जिसकी शादी उसने तीन साल पहले

एक खाते-पीते, पढ़े-लिखे परिवार में की थी…!

उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी-छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था…!

दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के

रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर…

उनका पेट बढ़ता ही चला गया…!

और अंत में एक दिन सीढ़ियों से

गिरकर बेटी की मौत की खबर

ही मायके पहुँची..!!!

आज वह छटपटाता है

कि उसकी वह बेटी फिर से

उसके पास लौट आये…?

और वह चुन-चुन कर उसकी

सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे…!

पर वह अच्छी तरह जानता है

कि अब यह असंभव है…!

“लगा दूँ बाबूजी…?,

एक हाथ में ही सही’

मेंहदी वाली की आवाज से

पिता की तंद्रा टूटी…!

“हाँ हाँ लगा दो…

एक हाथ में नहीं दोनों हाथों में…

और हाँ, इससे भी अच्छी वाली हो

तो वो लगाना” (पिता ने डबडबायी आँखें पोंछते हुए कहा!)

और ‘छोटी’ को आगे कर दिया…

जब तक बेटी हमारे घर है

उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करें,

क्या पता आगे कोई इच्छा

पूरी हो पाए या ना हो पाए?

ये बेटियाँ भी कितनी अजीब होती हैं…!

जब ससुराल में होती हैं

तब मायके जाने को तरसती हैं!
सोचती हैं कि घर जाकर माँ को ये बताऊँगी, पापा से ये माँगूंगी, बहिन से ये कहूँगी, भाई को सबक सिखाऊँगी
और मौज मस्ती करुँगी।

लेकिन

जब सच में मायके जाती हैं तो

एकदम शांत हो जाती हैं

किसी से कुछ भी नहीं बोलतीं…!

बस माँ-बाप, भाई-बहन से गले मिलती हैं, बहुत-बहुत खुश होती हैं,

भूल जाती हैं कुछ पल के लिए पति और ससुराल…

क्योंकि

एक अनोखा प्यार होता है मायके में

एक अजीब कशिश होती है मायके में।

ससुराल में कितना भी प्यार मिले

माँ बाप की एक मुस्कान को

तरसती है ये बेटियाँ…

ससुराल में कितना भी रोएँ…

पर मायके में एक भी आँसू नहीं

बहातीं ये बेटियाँ…!!

क्योंकि

बेटियों का सिर्फ एक ही आँसू

माँ-बाप, भाई-बहन को हिला देता है…रुला देता है…!!

कितनी अजीब होती हैं ये बेटियाँ,

कितनी नटखट होती हैं ये बेटियाँ,

भगवान की अनमोल देन होती हैं ये बेटियाँ।

सिर्फ़ किस्मत वालों के यहाँ ही होती हैं ये बेटियाँ।

हो सके तो

बेटियों को बहुत प्यार दें,

उन्हें कभी भी न रुलाएँ,

क्योंकि ये अनमोल बेटियाँ दो

परिवारों को जोड़ती हैं।

दो रिश्तों को साथ लाती हैं।

अपने प्यार और मुस्कान से।

हम चाहते हैं कि

सभी बेटियाँ खुश रहें हमेशा

भले ही वो मायके में हों या ससुराल में।

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है ना कमाल दोस्तों

आँखे तालाब नहीं, फिर भी, भर
आती है!
  दुश्मनी बीज नही, फिर भी, बोयी जाती है!
   होठ कपड़ा नही, फिर
भी, सिल जाते है!
   किस्मत सखी नहीं, फिर भी, रुठ जाती है!
  बुद्वि लोहा नही, फिर भी, जंग लग  जाती
है!
   आत्मसम्मान शरीर नहीं, फिर भी, घायल हो जाता है! और,
  इन्सान मौसम नही, फिर भी, बदल जाता है!…..

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The modern meaning of idioms

मुहावरो के आधुनिक अर्थ…!

1. खुद की जान खतरे में डालना = शादी करना

2. आ बैल मुझे मार = पत्नी से पंगा लेना

3. दीवार से सर फोड़ना = पत्नी को कुछ समझाना

4. चार दिन की चांदनी वही अँधेरी रात = पत्नी का मायके से वापस आना

5. आत्म हत्या के लिए प्रेरित करना = शादी की राय देना

6. दुश्मनी निभाना = दोस्तों की शादी करवाना

7. खुद का स्वार्थ देखना = शादी ना करना

8. पाप की सजा मिलना = शादी हो जाना

9. लव मैरिज करना = खुद से युद्ध करने को योद्धा ढूंढना

10. जिंदगी के मज़े लेना = कुँवारा रहना

11. ओखली में सिर देना = शादी के लिए हाँ करना

12. दो पाटों में पिसना = दूसरी शादी करना

13. खुद को लुटते हुऐ देखना = पत्नी को पर्स से पैसे निकालते हुए देखना

14. शादी के फ़ोटो देखना = गलती पर पश्चाताप करना

15. शादी के लिए हाँ करना = स्वेच्छा से जेल जाना

16. शादी = बिना अपराध की सजा

17. बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना = दुसरो के दुःख से खुश होना…

18. साली आधी घर वाली = वो स्कीम जो दूल्हे को बताई जाती है लेकिन दी नहीं जाती.

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ठंड पडबा लागगी

:Dठंड में खूब लो, खावा रो
मजो:D
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ऊना ऊना ढोकळा,
खाओ भली मोकळा ।

मक्की री रोटी, ऊपरे आका रींगणा,
ये पाछे मेले, आच्छा आच्छा जीमणा

जो वेईरा है, खापला,
खूब खाओ बापला ।

आतरे पातरे वणावो हाजो,
गणो बढ्या लागे, ताजो ताजो ।

रोट्या कटे अड़ी री, बापड़ी,
जदी मलिजा ऊनी ऊनी राबड़ी ।

सूबे सूबे खूब भावे लपटो,
जिने नी मले, वो करे खपटो ।

ऊनी ऊनी थाळी भरी गाट,
खावता खावता आँगळ्या जावो चाट

काजु, वदामा री भरी रेवे जेबा,
कुण खावें मिठाया रा ढेबा ।

भावे जतरी खावो जगळ,
पछे खूब करो दंगळ ।

काचाई चबाई जावो मूळा न गाजर,
छाने छाने खूब खावो घर में मोगर ।

पतळो पतळो मोगरी रो खाटो,
ऊबा ऊबा पिवो, नी पड़े घाटो ।

राजन पैईसा पे ध्यान मती दिजो,
ठंड में खूब खावा रो मजो लिजो ।
होचता होचता यूई परा रेवोला,
ठंड पाछी, गणा दन केड़े आवेला
गणा दन केड़े आवेला । ।

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