परिवार


​परिवार अब कहाँ ,परिवार तो कब के मर गए।

आज जो है,वह उसका केवल 

टुकड़ा भर रह गए ।


पहले होता था दादा का ,

बेटों पोतों सहित,भरा पूरा परिवार,

एक ही छत के नीचे ।

एक ही चूल्हे पर ,

पलता था उनके मध्य ,

अगाध स्नेह और प्यार।


अब तो रिश्तों के आईने ,

तड़क कर हो गए हैं कच्चे,

केवल मैं और मेरे बच्चे।

माँ बाप भी नहीं रहे

परिवार का हिस्सा,

तो समझिये खत्म ही हो गया किस्सा।


होगा भी क्यों नहीं,

माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में,

बेटों को घर से दूर

ठूंस देते हैं किसी होस्टल में,

पढ़ने के बहाने।

वंचित कर देते हैं प्रेम से

जाने अनजाने।


आज की शिक्षा 

हुनर तो सिखाती है ।

पर संस्कार कहाँ दे पाती है।


पढ़ लिख कर बेटा डॉलर की 

चकाचोंध में,

आस्ट्रेलिया, यूरोप या अमेरिका 

बस जाता है।

बाप को कंधा देने भी कहाँ पहुंच पाता है।


बाकी बस जाते हैं बंगलोर ,

हैदराबाद, मुम्बई,

नोएडा या गुड़गांव में।

फिर लौट कर नहीं आते

माँ बाप की छांव में।


पिछले वर्ष का है किस्सा ,

ऐसा ही एक बेटा ,देकर घिस्सा 

पुस्तैनी घर बेचकर ,

माँ के विश्वास को तोड़ गया ।

उसको यतीमों की तरह ,

दिल्ली के एयर पोर्ट पर छोड़ गया।


अभी अभी एक नालायक ने

माँ से बात नहीं की ,पूरे एक साल।

आया तो देखा माँ का आठ माह पुराना कंकाल ।

माँ से मिलने का तो केवल एक बहाना था ।

असली मकसद फ्लैट बेचकर खाना था।


आपसी प्रेम का खत्म होने को है पेटा ।

लड़ रहे हैं बाप और बेटा ।

करोड़पति सिंघानियां को लाले पड़ 

गये हैं खाने के ।

बेटे ने घर से निकाल दिया ,

चक्कर काट रहा है कोर्ट कचहरी थाने के।


परिवार को तोड़ने में अब तो

कानून ने भी बो दिए  हैं बीज ।

जायज है लिवइन रिलेशनशिप

और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज ।


ना मुर्गी ना अंडा ना सास ससुर का फंडा ।

जब पति पत्नी ही नहीं तो परिवार कहाँ से  बसते ।

कॉन्ट्रैक्ट खत्म ,चल दिये 

अपने अपने रस्ते ।

इस दौरान जो बच्चे हुए,

पलते हैं यतीमों की तरह ।

पीते हैं तिरस्कार का जहर ।


अर्थ की भागम भाग में 

मीलों पीछे छूट गए हैं ,

रिश्ते नातेदार ।

टूट रहे हैं घर परिवार ।

सूख रहा है प्रेम और प्यार ।

परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा सत्यानाश किया कि ,

आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी —-

“वन्स अपॉन अ टाइम ,

    देयर वाज लिवींग

जोइंट फैमिली इन इंडिया•

    दैट इज कॉल्ड परिवार”

परख में फरक

मेरी मां गलती से असली बाबा के पास चली गई. मेरी बीवी की शिकायत करने लगी. कहा – बहू ने बेटे को बस में कर रखा है, कुछ खिला- पिला दिया है, इल्म जानती है, उसकी काट चाहिए.


असली बाबा ने कहा – माताजी आप बूढ़ी हो गई हैं. भगवान के भजन कीजिए. बेटा जिंदगी भर आपके पल्लू से बंधा रहा. अब उसे जो चाहिए, वो कुदरतन उसकी बीवी के पास है. आपकी बहू कोई इल्म नहीं जानती. अगर आपको बेटे से वाकई मुहब्बत है, तो जो औरत उसे खुश रख रही है, उससे आप भी खुश रहिए.


मेरी मां आकर उस असली बाबा को कोस रही है क्योंकि उसने हकीकत बयान कर दी. मेरी मां चाहती थी कि बाबा कहे हां तुम्हारी बहू टोना टोटका जानती है. फिर बाबा उसे टोना तोड़ने का उपाय बताते और पैसा लेते. मेरी मां पैसा लेकर गई थी, मगर बाबा ने पैसा नहीं लिया.


कहा – तुम्हारी बहू को कुछ बनवा दो इससे.


मेरी मां और जल-भुन गई. मेरी मां को नकली बाबा चाहिए, असली नहीं.


मेरी बीवी भी असली बाबा के पास चली गई. कहने लगी – सास ने ऐसा कुछ कर रखा है कि मेरा पति मुझसे ज्यादा अपनी मां की सुनता है.


असली बाबा ने कहा – बेटी तुम तो कल की आई हुई हो,अगर तुम्हारा पति मां की इज्जत करता है, मां की बात मानता है, तो फख्र करो कि तुम श्रेष्ठ पुरुष की बीवी हो. तुम पतिदेव से ज्यादा सेवा अपनी सास की किया करो, तुमसे भी भगवान खुश होगा.


मेरी बीवी भी उस असली बाबा को कोस रही है. वो चाहती थी कि बाबा उसे कोई ताबीज दें, या कोई मन्त्र लिख कर दे दें, जिसे वो मुझे घोलकर पिला दे. मगर असली बाबा ने उसे ही नसीहत दे डाली. उसे भी असली नहीं, नकली बाबा चाहिए.


मेरे एक रिश्तेदार कंजूस हैं. उन्हें केंसर हुआ और वे भी असली बाबा के पास पहुंच गए. असली बाबा से केंसर का इलाज पूछने लगे.


बाबा ने उसे डांट कर कहा – भाई इलाज कराओ, भभूत से भी कहीं कोई बीमारी अच्छी होती है. हम रूहानी बीमारियों का इलाज करते हैं, कंजूसी भी एक रूहानी बीमारी है. जाओ अस्पताल जाओ, यहां मत आना.


उन्हें भी उस असली सन्त से चिढ़ हुई. कहने लगे – नकली है साला, कुछ जानता-वानता नहीं.


एक और रिश्तेदार चले गए असल सन्त के पास,पूछने लगे – धंधे में घाटा जा रहा है, कुछ दुआ कर दो.


सन्त ने कहा – दुआ से क्या होगा धंधे पर ध्यान दो. बाबा फकीरों के पास बैठने की बजाय दुकान पर बैठो, बाजार का जायजा लो कि क्या चल रहा है.


वे भी आकर खूब चिढ़े. वे चाह रहे थे कि बाबा कोई दुआ पढ़ दें. मगर असली सन्त इस तरह लोगों को झूठे दिलासे नहीं देते. इसीलिए लोगों को असली बाबा,असली संत, ईश्वर के असल बंदे नहीं चाहिए.


कबीर को, नानक को, रैदास को इसीलिए तकलीफें उठानी पड़ीं कि ये लोग सच बात कहते थे. किसी का लिहाज नहीं करते थे.


नकली फकीरों, और साधु संतों की हलचल इसीलिए संसार में ज्यादा है, क्योंकि लोग झूठ सुनना चाहते हैं, झूठ पर यकीन करना चाहते हैं, झूठे दिलासों में जीना चाहते हैं. सो लाख कह दिया जाए फलाँ फर्जी है, मगर लोगों फर्जी संत चाहिए.


*इस कठोर दुनिया में झूठ और झूठे दिलासे ही उनका सहारा हैं. सो जैसी डिमांड वैसी सप्लाई*

सब्जी वाला


लड़का और लड़की की शादी तो हो चुकी थी, पर दोनों में बन नहीं रही थी। पंडित ने कुंडली के 36 गुण मिला कर शादी का नारियल फोड़वाया था, पर शादी के साल भर बाद ही चिकचिक शुरू हो गई थी।
पत्नी अपने ससुराल वालों के उन अवगुणों का भी पोस्टमार्टम कर लेती, जिन्हें कोई और देख ही नहीं पाता था। 

लगता था कि अब तलाक, तो तब तलाक। पूरा घर तबाह होता नज़र आ रहा था। 

सबने कोशिश कर ली कि किसी तरह यह रिश्ता बच जाए, दो परिवार तबाही के दंश से बच जाएं, पर सारी कोशिशें व्यर्थ थीं।

जो भी घर आता, पत्नी अपने पति की ढेरों खामियां गिनाती और कहती कि उसके साथ रहना असम्भव है। वो कहती कि इसके साथ तो एक मिनट भी नहीं रहा जा सकता। दो बच्चे हो चुके हैं और बच्चों की खातिर किसी तरह ज़िंदगी कट रही है। 

उनके कटु रिश्तों की यह कहानी पूरे मुहल्ले में चर्चा का विषय बनी हुई थी।



ऐसे में एक दिन एक आदमी सब्जी बेचता हुआ उनके घर आ पहुंचा। उस दिन घर में सब्जी नहीं थी। 

“ऐ सब्जी वाले, तुम्हारे पास क्या-क्या सब्जियां हैं?”

“बहन, मेरे पास आलू, बैंगन, टमाटर, भिंडी और गोभी है।”

“जरा दिखाओ तो सब्जियां कैसी हैं?

सब्जी वाले ने सब्जी की टोकरी नीचे रखी। महिला टमाटर देखने लगी। 

सब्जी वाले ने कहा, “बहन आप टमाटर मत लो। इस टोकरी में जो टमाटर हैं, उनमें दो चार खराब हो चुके हैं। आप आलू ले लो।”

“अरे, चाहिए टमाटर तो आलू क्यों ले लूं? तुम टमाटर इधर लाओ, मैं उनमें से जो ठीक हैं उन्हें छांट लूंगी।”

सब्जी वाले ने टमाटर आगे कर दिए। 

महिला खराब टमाटरों को किनारे करने लगी और अच्छे टमाटर उठाने लगी। दो किलो टमाटर हो गया। 

फिर उसने भिंडी उठाई। 

सब्जी वाला फिर बोला, “बहन, भिंडी भी आपके काम की नहीं। इसमें भी कुछ भिंडी खराब हैं। आप आलू ले लीजिए। वो ठीक हैं।”

“बड़े कमाल के सब्जी वाले हो तुम। तुम बार-बार कह रहे हो आलू ले लो, आलू ले लो। भिंडी, टमाटर किसके लिए हैं? मेरे लिए नहीं है क्या?”

“मैं सारी सब्जियां बेचता हूं। पर बहन, आपको टमाटर और भिंडी ही चाहिए, मुझे पता है कि मेरी टोकरी में कुछ टमाटर और कुछ भिंडी खराब हैं, इसीलिए मैंने आपको मना किया। और कोई बात नहीं।”

“पर मैं तो अपने हिसाब से अच्छे टमाटर और भिंडियां छांट सकती हूं। जो ख़राब हैं, उन्हें छोड़ दूंगी। मुझे अच्छी सब्जियों की पहचान है।”

“बहुत खूब बहन। आप अच्छे टमाटर चुनना जानती हैं। अच्छी भिंडियां चुनना भी जानती हैं। आपने ख़राब टमाटरों को किनारे कर दिया। ख़राब भिंडियां भी छांट कर हटा दीं। पर आप अपने रिश्तों में एक अच्छाई नहीं ढूंढ पा रहीं। आपको उनमें सिर्फ बुराइयां ही बुराइयां नज़र आती हैं।

बहन, जैसे आपने टमाटर छांट लिए, भिंडी छांट ली, वैसे ही रिश्तों से अच्छाई को छांटना सीखिए। जैसे मेरी टोकरी में कुछ टमाटर ख़राब थे, कुछ भिंडी खराब थीं पर आपने अपने काम लायक छांट लिए, वैसे ही हर आदमी में कुछ न कुछ अच्छाई होती है। उन्हें छांटना आता, तो आज मुहल्ले भर में आपके ख़राब रिश्तों की चर्चा न चल रही होती।”

सब्जी वाला तो चला गया.. पर उस दिन महिला ने रिश्तों को परखने की विद्या सीख ली थी।

उस शाम घर में बहुत अच्छी सब्जी बनी। सबने खाई और कहा, बहू हो तो ऐसी हो।

शैलपुत्री

मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। ये ही सती के नाम से भी जानी जाती हैं। उनकी एक मार्मिक कहानी है। 

एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, भगवान शंकर को नहीं। सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं। शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है। 

 

सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे। भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव है। दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे। इससे सती को क्लेश पहुंचा। 

 

वे अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि द्वारा अपने को जलाकर भस्म कर लिया। इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। 

 

पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।

केशुमाली

Helping Others


Once there was a small boy named Shankar. He belonged to a poor family.  One day, he was crossing through the forest carrying some woods. He saw an old man who was very hungry.  Shankar wanted to give him some food, but he did not have food for his own.  So he continued on his way.  On his way, he saw a deer who was very thirsty.  He wanted to give him some water, but he did not have water for himself.  So he went on his way ahead.

Then he saw a man who wanted to make a camp but he did not have woods.  Shankar asked his problem and gave some woods to him.  In return, he gave him some food and water.  Now he went back to the old man and gave him some food and gave some water to the deer. The old man and the deer were very happy.   Shankar then happily went on his way.

However, one day Shankar fell down the hill.  He was in pain but he couldn’t move and no one was there to help him.  But, the old man who he had helped before saw him, he quickly came and pulled him up the hill.  He had many wounds on his legs.  The deer whom shankar had given water saw his wounds and quickly went to the forest and brought some herbs.  After some time his wounds were covered.   All were very happy that they were able to help each other.

Moral: If you help others, then they will also help you.

The Lazy Man and the God’s Plan


Once upon a time, there was a very lazy man who would always look for an easier way to feed himself. One day while he was searching for something to eat, he saw the fruit farm. He looked around and didn’t see anyone guarding the fruits on the tree, so he quickly decided to steal some fruits. But as soon as he walked into the farm and started to climb the tree, the farmer saw him and started coming at him to catch him. The lazy man saw the farmer coming at him with a stick, he got afraid and ran towards the forest nearby and went inside it to hide.

After some time when he felt he started to move on from the forest and while passing through, he saw the wonderful scene. There was a fox. It had only two legs and still was crawling on them happily. The lazy man thought, how can this fox stay alive in such condition?! The fox can’t run, how he must be able to feed himself or stay alive from the threat of other animals.

Suddenly, he saw the lion coming towards the fox with a piece of meat already in his mouth. All the animals ran away and the lazy man climbed up on the tree to save himself but, the fox stayed there only, he didn’t have the ability to run on two legs. But what happened next surprised the lazy man. The lion left a piece of meat which was in his mouth for the fox!

The lazy man felt happy seeing god’s play. He thought the god who is the creator of all, always has a plan set to take care of what he created. He felt that god must have something planned for him too. So, he left that place and sat somewhere away alone waiting for someone to feed him too. As time starting to pass, he kept looking at the road, waiting for his food. He waited there for 2 days without any food! Finally, he couldn’t bear the hunger and started to leave.

He met an old sage (a wise person famed for wisdom) on the way. He told everything happened to the sage. The sage first gave him some food and water. After having it, the lazy man asked the sage, “oh wise one, the god had shown his mercy on the crippled fox, but why the god was so cruel to me?”

The old sage with a smile said, “True that the creator has a plan for everyone. You are obviously a part of the god’s plan. But Son, You took his sign in a wrong way. He didn’t want you to be like the fox. He wanted you to be like the Lion”.

Moral: 

Often we misunderstand the signs. God has given everyone a strength and ability to do their part. Always learn to see the things in a positive way and see yourself in a strong position to help the ones who need. Don’t go for the easy choice. Make a right choice.