सुविचार

बहुत ही खूबसूरत लाईनें..
०००००००००००००००००००००
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!

डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!

अकल कितनी भी तेज ह़ो,
नसीब के बिना नही जीत सकती..

बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,
कभी बादशाह नही बन सका…!!”

“ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो,
ना ही तुम अपने कंधे पर सर
रखकर रो सकते हो !

एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है!
इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से!

रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि
कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर
जीवन अमीर जरूर बना देते है “

आपके पास मारुति हो या
बीएमडब्ल्यू – सड़क वही रहेगी |

आप टाइटन पहने या रोलेक्स – समय वही रहेगा |

आपके पास मोबाइल एप्पल का हो
या सेमसंग – आपको कॉल करने वाले
लोग नहीं बदलेंगे |

आप इकॉनामी क्लास में सफर करें या
बिज़नस में – आपका समय तो उतना ही लगेगा |

भव्य जीवन की लालसा रखने या जीने में
कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन सावधान रहे क्योंकि
आवश्यकताएँ पूरी हो सकती है, तृष्णा नहीं |

एक सत्य ये भी है कि धनवानो का
आधा धन तो ये जताने में चला जाता है
की वे भी धनवान हैं |

कमाई छोटी या बड़ी हो सकती है….
पर रोटी की साईज़ लगभग सब घर में एक जैसी ही
होती है।

शानदार बात
बदला लेने में क्या मजा है
मजा तो तब है जब तुम सामने
वाले को बदल डालो..||

इन्सान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले,
और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले…

‘कर्मो’ से ही पहेचान होती है इंसानो की…
महेंगे ‘कपडे’ तो,’पुतले’ भी पहनते है दुकानों में !!..

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वफादार कुत्ता

रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान बन्द ही कर रहा था
कि एक कुत्ता दुकान में आया । उसके मुॅंह में एक थैली थी। जिसमें सामान की लिस्ट और पैसे थे।

दुकानदार ने पैसे लेकर सामान उस थैली में भर दिया।
कुत्ते ने थैली मुॅंह मे उठा ली और चला गया।

दुकानदार आश्चर्यचकित होके कुत्ते के पीछे पीछे गया

ये देखने की इतने समझदार कुत्ते का मालिक कौन है।

कुत्ता बस स्टाॅप पर खडा रहा। थोडी देर बाद एक बस आई जिसमें चढ गया।

कंडक्टर के पास आते ही अपनी गर्दन आगे कर दी।
उस के गले के बेल्ट में पैसे और उसका पता भी था।

कंडक्टर ने पैसे लेकर टिकट कुत्ते के गले के बेल्ट मे रख दिया।

अपना स्टाॅप आते ही कुत्ता आगे के दरवाजे पे चला गया और पूॅंछ हिलाकर कंडक्टर को इशारा कर दिया।
बस के रुकते ही उतरकर चल दिया।

दुकानदार भी पीछे पीछे चल रहा था।
कुत्ते ने घर का दरवाजा अपने पैरोंसे २-३ बार खटखटाया।

अन्दर से उसका मालिक आया और लाठी से उसकी पिटाई कर दी।

दुकानदार ने मालिक से इसका कारण पूछा । मालिक बोला

“साले ने मेरी नींद खराब कर दी। चाबी साथ लेके नहीं जा सकता था गधा।”

जीवन की भी यही सच्चाई है। आपसे लोगों की अपेक्षाओं का कोई अन्त नहीं है।

जहाँ आप चूके
वहीं पर बुराई निकाल लेते हैं
और पिछली सारी अच्छाईयों को
भूल जाते हैं।

देख लो । यह संसार हैं ।

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कब, कहाँ और कैसे हथौड़ा मारना चाहिए,

कब, कहाँ और कैसे हथौड़ा मारना चाहिए, ये शायद मुझे ही पता है
एक बुजुर्ग अनुभवी भारतीय
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एक फैक्ट्री में एक इंजन ख़राब हो गया, बहुत सारे इंजीनियरों को बुलाया गया पर कुछ नहीं हुआ. फैक्ट्री को हर दिन लाखों रुपये का Loss हो रहा था.
एक दिन सारे इंजीनियर एक चाय की दुकान में बैठ कर इस Problem को discuss कर रहे थे, वहां बैठा एक बूढ़ा व्यक्ति सारी बातें सुन रहा था. उस बूढ़े व्यक्ति ने कहा – इंजीनियर साहब, क्या मैं वो इंजन देख सकता हूँ. सबने कहा – अरे ताऊ जब हमसे कुछ नहीं हुआ तो तुम क्या कर लोगे।
फिर भी बूढ़े व्यक्ति की जिद पर उनको इंजन दिखा दिया गया.
उस बूढ़े व्यक्ति ने एक मिनट सब कुछ देखा और फिर एक हथौड़ा माँगा।
(“Life doesn’t change in ONE MINUTE, but taking decision after thinking for ONE MINUTE can change life.”)
बस एक ही हथौड़ा मारा होगा उस बूढ़े व्यक्ति ने कि इंजन चालू हो गया.
सब लोग खुश.
उनसे पूछा गया कि कितने पैसे देने हैं, तो बूढ़े व्यक्ति ने कहा 1 लाख रुपये।
ये सुनकर 3 – 4 लोगों को तो चक्कर आ गया. जब उनसे बोला गया कि आपने करा ही क्या है, एक हथौड़ा ही तो मारा है.
तो उन बूढ़े व्यक्ति का जवाब सुनकर शायद सबका सिर चकरा गया होगा, उन्होंने कहा ” बेटा, हथौड़ा तो एक ही मारा है, पर कब, कहाँ और कैसे हथौड़ा मारना चाहिए, ये शायद मुझे ही पता है.
(Effort is important, but knowing where to make an effort in your life, makes all the difference.)
सार ये है कि :-
– हम इंसानों की समस्या है कि हम दूसरों के अनुभव (Experience), न तो लेते हैं, न ही किसी की सुनते हैं, न ही सुनना चाहते है, Self EGO से ग्रस्त हैं हम सब और अगर समस्या का समाधान पूछते भी है तो अपनी ही age group या अपने ही साथ के दोस्त से. सोचिये आपके साथ वाले को भी तो लगभग उतनी ही knowledge होगी।
– यहाँ पर आप लोग ही बताइये कि कितने लोग अपनी Family के बड़े बुजुर्गों या पड़े लिखे लोगों से उनका Experience लेते हैं ?
– हफ्ते में कितनी बार आप अपने माता – पिता, दादा – दादी या और कोई बुजुर्ग रिस्तेदार, दोस्त, पुराना Experienced साथी की मदद लेते हैं ?
– दोस्तों हर समस्या का हल है, अगर आपके पास उस समस्या का हल नहीं है तो इस ग़लतफ़हमी में मत रहिये कि आपके अपने भी उस समस्या का हल नहीं निकाल सकते, यकीन मानिये वो लोग अपने Experience से उस समस्या का हल चुटकियों में निकल देंगे। यहाँ सबसे बड़ी समस्या हम Young पीढ़ी की यह है कि, हम ये समझते हैं कि अगर हमने उन लोगों से अपनी problem discuss की तो वो लोग क्या कहेंगे, पता नहीं क्या सोचेंगे……
अरे भाई Tension मत लो तुम एक चीज पूछगे वो लोग अपने Experience से 10 solutions बता देगें और एक फायदा और हो जायेगा, आप लोगों में अपनापन भी बढ़ेगा ……
– मेहनत तो दुनिया में हर कोई कर रहा है, इसमें हम अपने आप के अंदर ये ग़लतफ़हमी न पालें कि दुनिया में मेहनत सिर्फ और सिर्फ हम ही कर रहे हैं.
– सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है कि मेहनत कब करनी है और दिमाग कब लगाना है ये पता होना चाहिए, जैसे कि ऊपर वाली कहानी में सभी इंजीनियर परेशान होने के बावजूद, उस कंपनी के पुराने इंजीनियर या हेल्पर से सलाह लेते तो शायद काम बहुत जल्दी हो जाता।
हाँ सबसे आखरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, दोस्तों हम किसी का Experience पैसों से नहीं खरीद सकते, पर प्यार से पूछने पर वो लोग तुम पर अपना Experience न्योछावर कर देंगे। विश्वास नहीं होता तो कर के देख लो, इसमें बुराई क्या है……..

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सच्ची पोस्ट

एक बार एक कुत्ते और गधे के बीच शर्त लगी कि जो जल्दी से जल्दी दौडते हुए दो गाँव आगे रखे एक सिंहासन पर बैठेगा…
वही उस सिंहासन का अधिकारी माना जायेगा, और राज करेगा.

जैसा कि निश्चित हुआ था, दौड शुरू हुई.

कुत्ते को पूरा विश्वास था कि मैं ही जीतूंगा.

क्योंकि ज़ाहिर है इस गधे से तो मैं तेज ही दौडूंगा.

पर अागे किस्मत में क्या लिखा है … ये कुत्ते को मालूम ही नही था.

शर्त शुरू हुई .

कुत्ता तेजी से दौडने लगा.

पर थोडा ही आगे गया न गया था कि अगली गली के कुत्तों ने उसे लपकना ,नोंचना ,भौंकना शुरू किया.

और ऐसा हर गली, हर चौराहे पर होता रहा..

जैसे तैसे कुत्ता हांफते हांफते सिंहासन के पास पहुंचा..

तो देखता क्या है कि गधा पहले ही से सिंहासन पर विराजमान है.

तो क्या…!  
   गधा उसके पहले ही वहां पंहुच चुका था… ?

और शर्त जीत कर वह राजा बन चुका था.. !

और ये देखकर

निराश हो चुका कुत्ता बोल पडा..

अगर मेरे ही लोगों ने मुझे आज पीछे न खींचा होता तो आज ये गधा इस सिंहासन पर न बैठा होता …

तात्पर्य …

१. अपने लोगों को काॅन्फिडेंस में लो.

२. अपनों को आगे बढने का मौका दो,  उन्हें मदद करो.

३. नही तो कल बाहरी गधे हम पर राज करने लगेंगे.

४. पक्का विचार और आत्म परीक्षण करो.

⭐जो मित्र आगे रहकर होटल के बिल का पेमेंट करतें हैं, वो उनके पास खूब पैसा है इसलिये नही … ⭐

⭐बल्कि इसलिये.. कि उन्हें मित्र  पैसों से अधिक प्रिय हैं ⭐

⭐ऐसा नही है कि जो हर काम में आगे रहतें हैं वे मूर्ख होते हैं, बल्कि उन्हें अपनी जवाबदारी का एहसास हरदम बना रहता है इसलिये  ⭐

⭐जो लडाई हो चुकने पर पहले क्षमा मांग लेतें हैं, वो इसलिये नही, कि वे गलत थे… बल्कि उन्हें अपने लोगों की परवाह होती है इसलिये.⭐

⭐जो तुम्हे मदद करने के लिये आगे आतें हैं वो तुम्हारा उनपर कोई कर्ज बाकी है इसलिये नही… बल्कि वे तुम्हें अपना मानतें हैं इसलिये⭐

⭐जो खूब वाट्स एप पोस्ट भेजते रहतें हैं वो इसलिये नही कि वे निरे फुरसती होतें हैं …
बल्कि उनमें सतत आपके संपर्क में बनें रहने की इच्छा रहती है … इसलिये ⭐

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वास्तविक आजादी

पिंजरे में कैद थी एक चिड़िया मगर कैद उसे स्वीकार्य न थी । रात- दिन बस एक ही रट लगाये रहती – मुझे आजादी चाहिये, हर हाल में आजादी चाहिये । भविष्य की आहट को सुनकर एक दिन मालिक ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया । वह गुनगुना उठी मैं आजाद हूँ, मैं आजाद हूँ । गाते- गाते उड़ने लगी । जिस दिशा में जितनी दूर तक उड सकती थी , उड़ी । उड़ते- उड़ते थक गई, भूख लग आई । फिर उसे मालिक का ख्याल आया । वह लौटकर उसके घर के बाहर लगे बरगद के पेड़ की डाल पर आकर बैठ गई । धीरे से बोलीस मैं भूखी हूँ, लेकिन अगले ही पल उसे याद आया की इस तरह की दयनीयता एक चिड़िया को शोभा नहीं देती । और उसने सोचा कि मैं भूखी तो हूँ लेकिन आजाद भी हूँ । मालिक ने कहा तुम आजाद हो, लेकिन तुम्हें भूख भी लगी है, लो ये दाने चुग लो (खा लो) । मालिक ने कुछ दाने बिखेर दिये । दाने खाकर उस चिड़िया को कुछ ऊर्जा मिली । उसमें फिर उड़ने की इच्छा जागी, फिर जिस दिशा में जितनी दूर जा सकती थी गई । चिड़िया को फिर से भूख लगी तथा वह फिर से मालिक के बरगद पर आ बैठी, मालिक ने फिर से खाने के लिए दाने दिये, फिर वह गुनगुनाई मैं आजाद हूँ । मालिक ने कहा हाँ तुम आजाद हो , मगर भूखी हो ।

चिड़िया खुश है कि वह पिंजरे में नहीं है और आजाद है । मालिक भी खुश है कि उसे चिड़िया को कैद रखने के लिए पिंजरे की जरूरत नही है ।

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काबिलियत

किसी  जंगल  में  एक  बहुत  बड़ा  तालाब  था . तालाब  के   पास  एक बागीचा  था , जिसमे  अनेक  प्रकार  के पेड़  पौधे  लगे थे . दूर- दूर  से  लोग  वहाँ  आते  और बागीचे  की  तारीफ  करते .
हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता, उसे लगता की हो सकता है एक दिन कोई  उसकी भी तारीफ करे. पर जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उसकी तारीफ नहीं की तो वो काफी हीन महसूस करने लगा . उसके अन्दर तरह-तरह के विचार आने लगे—” सभी लोग गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते  पर मुझे कोई देखता तक नहीं , शायद  मेरा जीवन किसी काम का नहीं …कहाँ ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं… ” और ऐसे विचार सोच कर वो पत्ता काफी उदास रहने लगा.

दिन यूँही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में बड़ी जोर-जोर से हवा चलने लगी और देखते-देखते उसने आंधी का रूप ले लिया.  बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे , देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए , पत्ता भी अपनी शाखा से अलग हो गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा.

पत्ते ने देखा कि  उससे कुछ ही दूर पर कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी.

चींटी  प्रयास करते-करते  काफी  थक  चुकी  थी और  उसे अपनी मृत्यु तय लग रही थी कि  तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी, ” घबराओ नहीं,  आओ , मैं  तुम्हारी  मदद  कर  देता  हूँ .”, और ऐसा कहते हुए अपनी उपर बैठा लिया. आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुँच गया; चींटी किनारे पर पहुँच कर बहुत खुश हो गयी और  बोली, ”  आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है , सचमुच आप महान हैं, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! “

यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला,” धन्यवाद तो मुझे  करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ , जिससे मैं आज तक अनजान था.  आज पहली बार मैंने अपने  जीवन  के  मकसद और  अपनी  ताकत  को पहचान  पाया हूँ … .’

मित्रों , ईश्वर  ने हम सभी को अनोखी शक्तियां दी हैं ; कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और समय आने पर हमें इसका पता चलता है, हमें इस बात को समझना चाहिए कि   किसी  एक  काम  में  असफल  होने  का  मतलब  हमेशा   के  लिए  अयोग्य  होना  नही  है . खुद  की  काबिलियत  को  पहचान कर  आप  वह  काम   कर  सकते  हैं , जो  आज  तक  किसी  ने  नही  किया  है !

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बडा काम छोटा काम

शहर की मेन मार्केट में  एक  गराज  था  जिसे  अब्दुल  नाम  का  मैकेनिक चलाता  था . वैसे  तो  अब्दुल  एक अच्छा आदमी  था  लेकिन  उसके  अन्दर  एक  कमी  थी , वो  अपने  काम  को  बड़ा  और दूसरों  के  काम  को  छोटा  समझता  था .

एक  बार  एक  हार्ट  सर्जन  अपनी  लक्ज़री कार लेकर  उसके  यहाँ  सर्विसिंग  कराने  पहुंचे . बातों -बातों  में  जब  अब्दुल  को  पता  चला  की  कस्टमर  एक  हार्ट  सर्जन  है  तो  उसने  तुरन्त  पूछा , “  डॉक्टर साहब  मैं  ये  सोच रहा  था  की  हम  दोनों  के  काम एक  जैसे  हैं… !”

“एक  जैसे  ! वो  कैसे ?” , सर्जन  ने थोडा अचरज से पूछा .

“देखिये  जनाब ,” अब्दुल कार  के कौम्प्लिकेटेड इंजन  पर  काम  करते  हुए  बोल , “ ये  इंजन  कार  का  दिल  है  , मैं  चेक  करता  हूँ  की  ये  कैसा  चल  रहा  है  , मैं  इसे  खोलता  हूँ  , इसके  वाल्वस फिट करता  हूँ , अच्छी तरह  से  सर्विसिंग  कर  के  इसकी प्रोब्लम्स ख़तम  करता  हूँ  और  फिर  वापस  जोड़  देता  हूँ …आप  भी  कुछ  ऐसा  ही  करते  हैं  ; क्यों  ?”

“हम्म ”, सर्जन  ने  हामी  भरी .
“तो  ये  बताइए  की  आपको  मुझसे  10 गुना  अधिक  पैसे  क्यों  मिलते  हैं, काम तो आप भी मेरे जैसा ही करते हैं ?”, अब्दुल  ने  खीजते  हुए पूछा .

सर्जन  ने  एक क्षण सोचा  और  मुस्कुराते  हुए बोला  , “ जो  तुम  कर  रहे  हो  उसे चालू इंजन  पे  कर के  देखो  , समझ  जाओगे .”

अब्दुल को इससे पहले किसी ने ऐसा जवाब नही दिया था, अब वह अपनी गलती समझ चुका था.

Friends, हर एक  काम की  अपनी  importance होती  है , अपने  काम  को  बड़ा समझना ठीक  है  पर  दूसरों  के  काम  को  कभी  छोटा  नहीं  समझना  चाहिए  ; हम  औरों  के  काम  के  बारे  में  बस उपरी तौर पे  जानते  हैं  लेकिन  उसे  करने  में  आने  वाले  challenges के  बारे  में  हमें  कुछ  ख़ास  नहीं  पता  होता . इसलिए  किसी  के  काम  को  छोटा  नहीं  समझें  और  सभी  की  respect करें .

Posted from Keshumali