इन पांच लोगों से कभी नहीं करनी चाहिए दोस्ती

महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव जीत गए, युधिष्ठिर राजा बन गए, तब वो कुरुक्षेत्र में तीरों की शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह से राजनीति की शिक्षा लेने पहुंचे। भीष्म ने युधिष्ठिर को जितनी भी बातें बताईं वे आज भी हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है। इंसान को किस तरह के लोगों से रिश्ते बनाने चाहिए और किस तरह े लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए, इसे लेकर भी भीष्म ने युधिष्ठिर को पूरा ज्ञान दिया। आइए, जानते हैं कि भीष्म ने युधिष्ठिर को किन लोगों से हमेशा दूर रहने और दोस्ती ना करने का उपदेश दिया था ।

1. आलसी 
आलस मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है। आलसी व्यक्ति जीवन में किसी भी अवसर का लाभ नहीं लेता। आलस की वजह से मनुष्य अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता और सबकी नजरों में बुराई का पात्र बनता जाता है। ना तो वह अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहता है, ना आपने कामों के प्रति। उसकी संगति से हम भी आलसी होने लगते हैं। इन्हीं कारणों से आलसी मनुष्य से कभी दोस्ती नहीं करनी चाहिए।

2. नास्तिक
कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो भगवान और धर्म में आस्था नहीं रखते। जिन्हें ना तो धर्म-ज्ञान से कोई मतलब होता है, ना ही देव भक्ति से। ऐसा व्यक्ति धर्म और शास्त्रों में विश्वास ना होने की वजह से अधर्मी और पापी होता है। झूठ बोलना, बुरा व्यवहार करना आदि उसका स्वभाव बन जाता है। वह खुद का जीवन तो नरक के समान बनाता ही है, साथ ही उससे संबंध रखने वालों का व्यवहार भी अपने समान कर देता है। ऐसे मनुष्य की संगति से सदैव दूरी बनाए रखनी चाहिए।

3. क्रोध करने वाला
बेवजह या अत्यधिक क्रोध करने वाले का व्यवहार दानव के समान माना जाता है। क्रोध करने से मनुष्य हमेशा ही अपना नुकसान करता है। कई बार निन्दा और हास्य का पात्र भी बन जाता है। ऐसे व्यक्ति से दोस्ती करके पर ना केवल खुद को बल्कि अपने परिजनों को भी हानि पहुंचती है। अतः क्रोध करने वालों से कभी मित्रता नहीं करनी चाहिए।

4. जलन या द्वेष रखने वाला
जो मनुष्य दूसरों के प्रति अपने मन में जलन या द्वेष की भावना रखता है, वह निश्चित ही छल-कपट करने वाला, पापी, धोखा देने वाला होता है। वह दूसरों के नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। जलन और द्वेष भावना रखने वाले के लिए सही-गलत के कोई पैमाने नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति की दोस्ती हमें भी उसी की तरह दुराचारी बना देती है।

5. शराब पीने वाला
सामाजिक जीवन में सभी के लिए कुछ सीमाएं होती है। हर व्यक्ति को उन सीमाओं का हमेशा पालन करना चाहिए, लेकिन शराब पीने वाले मनुष्य के लिए कोई सीमा नहीं होती। शराब पीने के बाद उसे अच्छे-बुरे किसी का भी होश नहीं रहता है। ऐसा व्यक्ति अपने परिवार और मित्रों को कष्ट पहुंचाने वाला होता है। वह किसी भी समय आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

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कुत्ते की वफादारी

:|कोर्ट में एक अजीब मुकदमा आया:|
:|एक सिपाही एक कुत्ते को बांध कर लाया:|
:|सिपाही ने जब कटघरे में आकर  कुत्ता खोला:|
:|कुत्ता रहा चुपचाप, मुँह से कुछ ना बोला..!:|
:|नुकीले दांतों में कुछ खून-सा नज़र आ रहा था:|
:|चुपचाप था कुत्ता, किसी से ना नजर मिला रहा था:|
:|फिर हुआ खड़ा एक वकील ,देने लगा दलील:|
:|बोला, इस जालिम के कर्मों से यहाँ मची तबाही है:|
:|इसके कामों को देख कर इन्सानियत घबराई है:|
:|ये क्रूर है, निर्दयी है, इसने तबाही मचाई है:|
:|दो दिन पहले जन्मी एक कन्या, अपने दाँतों से खाई है:|
:|अब ना देखो किसी की बाट:|
:|आदेश करके उतारो इसे मौत के घाट:|
:|जज की आँख हो गयी लाल:|
:|तूने क्यूँ खाई कन्या, जल्दी बोल डाल:|
:|तुझे बोलने का मौका नहीं देना चाहता:|
:|लेकिन मजबूरी है, अब तक तो तू फांसी पर लटका पाता:|
:|जज साहब, इसे जिन्दा मत रहने दो:|
:|कुत्ते का वकील बोला, लेकिन इसे कुछ कहने तो दो:|
:|फिर कुत्ते ने मुंह खोला ,और धीरे से बोला:|
:|हाँ, मैंने वो लड़की खायी है:|
:|अपनी कुत्तानियत निभाई है:|
:|कुत्ते का धर्म है ना दया दिखाना:|
:|माँस चाहे किसी का हो, देखते ही खा जाना:|
:|पर मैं दया-धर्म से दूर नही:|
:|खाई तो है, पर मेरा कसूर नही:|
:|मुझे याद है, जब वो लड़की छोरी कूड़े के ढेर में पाई थी:|
:|और कोई नही, उसकी माँ ही उसे फेंकने आई थी:|
:|जब मैं उस कन्या के गया पास:|
:|उसकी आँखों में देखा भोला विश्वास:|
:|जब वो मेरी जीभ देख कर मुस्काई थी:|
:|कुत्ता हूँ, पर उसने मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई थी:|
:|मैंने सूंघ कर उसके कपड़े, वो घर खोजा था:|
:|जहाँ माँ उसकी थी, और बापू भी सोया था:|
:|मैंने भू-भू करके उसकी माँ जगाई:|
:|पूछा तू क्यों उस कन्या को फेंक कर आई:|
:|चल मेरे साथ, उसे लेकर आ:|
:|भूखी है वो, उसे अपना दूध पिला:|
:|माँ सुनते ही रोने लगी:|
:|अपने दुख सुनाने लगी:|
:|बोली, कैसे लाऊँ अपने कलेजे के टुकड़े को:|
:|तू सुन, तुझे बताती हूँ अपने दिल के दुखड़े को:|
:|मेरी सासू मारती है तानों की मार:|
:|मुझे ही पीटता है, मेरा भतार:|
:|बोलता है लङ़का पैदा कर हर बार 😐
:|लङ़की पैदा करने की है सख्त मनाही:|
:|कहना है उनका कि कैसे जायेंगी ये सारी ब्याही:|
:|वंश की तो तूने काट दी बेल:|
:|जा खत्म कर दे इसका खेल:|
:|माँ हूँ, लेकिन थी मेरी लाचारी:|
:|इसलिए फेंक आई, अपनी बिटिया प्यारी:|
:|कुत्ते का गला भर गया:|
:|लेकिन बयान वो पूरे बोल गया….!:|
:|बोला, मैं फिर उल्टा आ गया:|
:|दिमाग पर मेरे धुआं सा छा गया:|
:|वो लड़की अपना, अंगूठा चूस रही थी:|
:|मुझे देखते ही हंसी, जैसे मेरी बाट में जग रही थी:|
:|कलेजे पर मैंने भी रख लिया था पत्थर:|
:|फिर भी काँप रहा था मैं थर-थर:|
:|मैं बोला, अरी बावली, जीकर क्या करेगी:|
:|यहाँ दूध नही, हर जगह तेरे लिए जहर है, पीकर क्या करेगी:|
:|हम कुत्तों को तो, करते हो बदनाम:|
:|परन्तु हमसे भी घिनौने, करते हो काम:|
:|जिन्दी लड़की को पेट में मरवाते हो:|
:|और खुद को इंसान कहलवाते हो:|
:|मेरे मन में, डर कर गयी उसकी मुस्कान
:|लेकिन मैंने इतना तो लिया था जान:|
:|जो समाज इससे नफरत करता है:|
:|कन्याहत्या जैसा घिनौना अपराध करता है:|
:|वहां से तो इसका जाना अच्छा:|
:|इसका तो मर जान अच्छा:|
:|तुम लटकाओ मुझे फांसी, चाहे मारो जूत्ते:|
:|लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते:|
😥लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते

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बुलेट ट्रेन

यह कहानी मेरे दिल के बहुत करीब है📝
जरूर पढ़े और कमेंट्स भी लिखे
जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई, एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़।दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।
” ये जनरल टिकट है।अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।” कह टीसी आगे चला गया।
पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे। बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे। लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे। ” साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।” टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।
” सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।”
” आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।” अबकि बार पत्नी ने कहा।
” तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।”
” ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।
” नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी।देश में बुलेट ट्रेन जो आ रही है।एक लाख करोड़ का खर्च है।कहाँ से आयेगा इतना पैसा ? रसीद बना-बनाकर ही तो जमा करना है।ऊपर से आर्डर है।रसीद तो बनेगी ही।
चलो, जल्दी चार सौ निकालो।वरना स्टेशन आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।” इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।
आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो। पास ही खड़े दो यात्री बतिया रहे थे।” ये बुलेट ट्रेन क्या बला है ? “
” बला नहीं जादू है जादू।बिना पासपोर्ट के जापान की सैर। जमीन पर चलने वाला हवाई जहाज है, और इसका किराया भी हबाई सफ़र के बराबर होगा, बिना रिजर्वेशन उसे देख भी लो तो चालान हो जाएगा। एक लाख करोड़ का प्रोजेक्ट है। राजा हरिश्चंद्र को भी ठेका मिले तो बिना एक पैसा खाये खाते में करोड़ों जमा हो जाए।
सुना है, “अच्छे दिन ” इसी ट्रेन में बैठकर आनेवाले हैं। “
उनकी इन बातों पर आसपास के लोग मजा ले रहे थे। मगर वे दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे
ऐसे बैठे थे मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके सोग में जा रहे हो। कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए? क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा? नहीं-नहीं। आखिर में पति बोला- ” सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था। गुड्डो के घर पैदल ही चलेंगे। शाम को खाना नहीं खायेंगे। दो सौ तो एडजस्ट हो गए। और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे। सौ रूपए बचेंगे। एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा। सेठ भी चिल्लायेगा। मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा।मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।”
” ऐसा करते हैं, नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न, अब दोनों मिलकर सौ देंगे। हम अलग थोड़े ही हैं। हो गए न चार सौ एडजस्ट।” पत्नी के कहा। ” मगर मुन्ने के कम करना….””
और पति की आँख छलक पड़ी।
” मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डो जब मुन्ना को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। “कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली-” अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-” इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय, इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो, जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो।” उसकी आँख फिर छलके पड़ी।
” अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं, हमें
मोदीजी को वोट देने का तो अधिकार है, पर सलाह देने का नहीं। रो मत

कहानी का नाम✏

बुलेट ट्रेन

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क्या है खुश रहने का राज़

Secret of Happiness

एक समय की बात है, एक गाँव में महान ऋषि रहते थे| लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे और ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे| एक दिन एक व्यक्ति, ऋषि के पास आया और ऋषि से एक प्रश्न पूछा| उसने ऋषि से पूछा कि “गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है (What is the Secret of Happiness)?” ऋषि ने उससे कहा कि तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे खुश रहने का राज़ (Secret of Happiness) बताता हूँ|

ऐसा कहकर ऋषि और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे| रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस व्यक्ति को कह दिया कि इसे पकड़ो और चलो| उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया और वह ऋषि के साथ साथ जंगल की तरफ चलने लगा|

कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा| लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उस व्यक्ति से दर्द सहा नहीं गया तो उसने ऋषि से कहा कि उसे दर्द हो रहा है| तो ऋषि ने कहा कि इस पत्थर को नीचे रख दो| पत्थर को नीचे रखने पर उस व्यक्ति को बड़ी राहत महसूस हुयी|

तभी ऋषि ने कहा – “यही है खुश रहने का राज़ (Secret of Happiness)”| व्यक्ति ने कहा – गुरुवर मैं समझा नहीं|

तो ऋषि ने कहा-

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जिस तरह इस पत्थर को एक मिनट तक हाथ में रखने पर थोडा सा दर्द होता है और अगर इसे एक घंटे तक हाथ में रखें तो थोडा ज्यादा दर्द होता है और अगर इसे और ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे तो दर्द बढ़ता जायेगा उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दु:खी और निराश रहेंगे| यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को एक मिनट तक उठाये रखते है या उसे जिंदगी भर| अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दु:ख रुपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लो और हो सके तो उसे उठाओ ही नहीं

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Law of Attraction

 एक प्राकृतिक सत्य है| जब हम किसी चीज को सच्चे दिल से चाहें तो एक अद्भुत प्राकृतिक शक्ति उस लक्ष्य को प्राप्त करने में हमारी मदद करने लग जाती है| हमारी सारी समस्याएं दूर होने लगती है और सारे बंद दरवाजे अपने आप खुलने लगते है|
क्या आप दिन में सपने देखते हैं?  

अगर आपका जवाब हाँ है तो आप अभी तक इन्सान है| और अगर आपका जवाब ना है तो शायद आप एक रोबोट बन चुके है या बनने जा रहे है|

सभी इन्सान सपने देखते है लेकिन 30 वर्ष की उम्र तक आते-आते ज्यादातर व्यक्ति परिस्थितियों के आगे हार मान लेते है और वो एक रोबोट की तरह परिस्थितियों के अनुसार चलते है|

अगर आप चाहते है कि आपके सपने सच हो तो आपको सपने देखने पड़ेगें|

 

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क्या आपके सपनों में “शक्ति” है? : 
अब्दुल कलाम ने कहा है –

सपने वो नहीं है जो आप नींद में देखते हैसपने वो है जो आपको नींद नहीं आने देते।

अगर आपके लक्ष्य या सपनों में दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी है तो आपका सपना कभी हकीकत नहीं बन सकता| दृढ़ इच्छाशक्ति ही Law of Attraction का आधार है| यह इच्छाशक्ति ही है जो आपको “लक्ष्य” से जोड़े रखती है और निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है|

और जब आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार होते है तो पूरी कायनात आपके लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी मदद करती है|   

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अब्दुल कलाम ने कहा है –

सपने वो नहीं है जो आप नींद में देखते हैसपने वो है जो आपको नींद नहीं आने देते।

अगर आपके लक्ष्य या सपनों में दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी है तो आपका सपना कभी हकीकत नहीं बन सकता| दृढ़ इच्छाशक्ति ही Law of Attraction का आधार है| यह इच्छाशक्ति ही है जो आपको “लक्ष्य” से जोड़े रखती है और निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है|

और जब आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार होते है तो पूरी कायनात आपके लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी मदद करती है|   

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विश्वास :  Confidence

आपके लक्ष्य में “डर” का कोई स्थान नहीं होना चाहिए| अगर आपको स्वंय पर पूरा विश्वास नहीं है या फिर “असफलता का डर” है तो आपका सपना या लक्ष्य शक्तिहीन है| जहाँ “डर” होता है वहां “विश्वास” कमजोर पड़ जाता है| और जब आपको स्वंय पर ही विश्वास नहीं रहता तो पूरी कायनात आपकी मदद कैसे करेगी?

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अपने सपनों को जिन्दा रखिए| अगर आपके सपनों की चिंगारी बुझ गई है तो इसका मतलब यह है कि आपने जीते जी आत्महत्या कर ली है|

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भगवान का अस्तित्व

एक बार एक व्यक्ति नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने गया| नाई और उस व्यक्ति के बीच में ऐसे ही बातें शुरू हो गई और वे लोग बातें करते-करते “भगवान” के विषय पर बातें करने लगे|

तभी नाई ने कहा – “मैं भगवान (Bhagwan) के अस्तित्व को नहीं मानता और इसीलिए तुम मुझे नास्तिक भी कह सकते हो”

“तुम ऐसा क्यों कह रहे हो”  व्यक्ति ने पूछा|

नाई ने कहा –  “बाहर जब तुम सड़क पर जाओगे तो तुम समझ जाओगे कि भगवान का अस्तित्व नहीं है| अगर भगवान (Bhagwan) होते, तो क्या इतने सारे लोग भूखे मरते? क्या इतने सारे लोग बीमार होते? क्या दुनिया में इतनी हिंसा होती? क्या कष्ट या पीड़ा होती? मैं ऐसे निर्दयी ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता जो इन सब की अनुमति दे”

व्यक्ति ने थोड़ा सोचा लेकिन वह वाद-विवाद नहीं करना चाहता था इसलिए चुप रहा और नाई की बातें सुनता रहा|

नाई ने अपना काम खत्म किया और वह व्यक्ति नाई को पैसे देकर दुकान से बाहर आ गया| वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, उसने सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी और ऐसा लगता था शायद उसने कई महीनों तक अपने बाल नहीं कटवाए थे|

वह व्यक्ति वापस मुड़कर नाई की दुकान में दुबारा घुसा और उसने नाई से कहा – “क्या तुम्हें पता है? नाइयों का अस्तित्व नहीं होता”

नाई ने कहा – “तुम कैसी बेकार बातें कर रहे हो? क्या तुम्हे मैं दिखाई नहीं दे रहा? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ| और मैंने अभी अभी तुम्हारे बाल काटे है|”

व्यक्ति ने कहा –  “नहीं ! नाई नहीं होते हैं| अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी वाला होता?”

नाई ने कहा – “अगर वह व्यक्ति किसी नाई के पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं तो नाई कैसे उसके बाल काटेगा?”

व्यक्ति ने कहा –  “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, यही बात है| भगवान भी होते है लेकिन कुछ लोग भगवान पर विश्वास ही नहीं करते तो भगवान उनकी मदद कैसे करेंगे|”

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अशांत मन

“एक बार एक रेस्टोरेंट में एक कॉकरोच (तिलचिट्टा) कही से उड़कर एक महिला पर जा गिरा| वह महिला डर के मारे चिल्लाने लगी और इधर उधर उछलने लगी| उसका चेहरा कॉकरोच के आतंक से भयभित था और वह किसी भी तरह से कॉकरोच से छुटकारा पाने का प्रयास कर रही थी| और आख़िरकार वह कॉकरोच से पीछा छुड़ाने में कामयाब रही|

लेकिन वह कॉकरोच पास बैठी महिला पर जा गिरा और अब वह भी उसी तरह चिल्लाने लगी| एक वेटर महिला को कॉकरोच से बचाने के लिए आगे बढ़ा तभी वह कॉकरोच उस वेटर पर जा गिरा|

वेटर ने बड़े शांत तरीके से अपनी कमीज पर उस कॉकरोच के स्वभाव को देखा और फिर धीरे से उसे अपने हाथों से पकड़कर रेस्टोरेंट के बाहर फेंक दिया|

मैं इस मनोरंजन को देख रहा था और कॉफ़ी पी रहा था तभी मेरे मन के एंटीना पर कुछ विचार आने लगे कि क्या उन दो महिलाओं के इस भयानक व्यवहार एंव अशांति के लिए वो कॉकरोच जिम्मेदार था ?? अगर ऐसा था तो उस कॉकरोच ने वेटर को अशांत क्यों नहीं किया? उसने बड़े शांत तरीके से कॉकरोच को दूर कर दिया|

महिलाओं की अशांति का कारण वो कॉकरोच नहीं था बल्कि कॉकरोच से निपटने की असक्षमता उनकी अशांति की असली वजह थी|

मैंने महसूस किया कि मेरे पिता या मेरे बॉस की डांट मेरी अशांति का कारण नहीं है बल्कि उस डांट को संभालने की मेरी असक्षमता ही मेरी अशांति का कारण है|

मेरी अशांति का कारण ट्रैफिक जाम नहीं बल्कि उस ट्रैफिक से होने वाली परेशानी को सँभालने की मेरी असक्षमता ही मेरी अशांति का कारण है|

हमारे जीवन में अशांति का कारण समस्याएँ नहीं बल्कि अशांति का कारण समस्याओं के प्रति हमारा व्यवहार होता है|

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पतंगबाजी से मिला सफल जीवन का रहस्य

🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅
  🌿🌿🌿शुभ प्रभातम्🌿🌿🌿
एक बेटे ने पिता से पूछा – पापा ये ‘सफल जीवन’ क्या होता है ?
पिता, बेटे को पतंग उड़ाने ले गए। 
बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था…
थोड़ी देर बाद बेटा बोला,
पापा.. ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!  ये और ऊपर चली जाएगी…
पिता ने धागा तोड़ दिया ..
पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आइ और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई…
तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया…
बेटा..
‘जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं
  जैसे :
            घर,
          परिवार,
        अनुशासन,
        माता-पिता,
         गुरू आदि
और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं…
वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं.. इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो  बिन धागे की पतंग का हुआ…’
“अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.”
” धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही ‘सफल जीवन’ कहते हैं  “
🙏🙏🙏जयश्रीकृष्ण🙏🙏🙏
🌸🌸मकरसन्क्रान्ति🌸🌸

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भारत माता के वीर सपूत

अपने दिल की इक छोटी सी
                      पीडा को बतलाता हूँ।
आओ तुम्हे इक कडवे सच की
                       मै तस्वीर दिखाता हूँ।।

कल बिना सीट कुछ सैनिक देखे
                               एक ट्रेन में खडे हुए।
कुछ खोल के बिस्तर बंद थे सम्मुख
                                शौचालय के पडे हुए।।

सीट नही कन्फर्म तुम्हारी
                        T.T. यूँ चिल्लाता था।
मार-मार धक्के जनरल
                        डब्बे की तरफ भगाता था।।

तब लगा किसी ने मुझको मेरे
                       अंदर से धिक्कारा है।
लगा किसी ने भारत माँ के
                        मुँह पर थप्पड मारा है।।

तब लगा कि मैने अब तक सच में
                           हिन्दुस्तान नही देखा।
मैने वीर जवानों का
                        ऐसा अपमान नही देखा।।

कल ही तो मंजूर हुई थी
                     छुट्टी उन बेचारों की।
कल ही वारंट,  C.V. टूटी
                     थी किस्मत के मारों की।।

रात-रात में फिर कैसे
                 कन्फर्म सीट वो पा जाते।
लेकिन T.T तो T.T है
                 उसको कैसे समझाते।।

मैने ऐसा दुखद नजारा
                   देखा पहली बार था।
सीट पे बैठाने भर तक को
                    नही कोई तैय्यार था।।

कितनी ही ट्रेनों में सैनिक
                     आते -जाते देखा हूँ।
औरों को भी खुद की सीटों
                      पर बैठाते देखा हूँ।।

पर आज एक सैनिक की बीवी
                        गोद ले बच्चा खडी रही।
हैरत में था मगर आत्मा
                         सबकी सोयी पडी रही।।

संकट मे हो देश तो सबसे
                       पहले सैनिक जाते हैं।
देश की जनता की खातिर वो
                      अपना शीश कटाते हैं।।

उस वक्त तो ये जनता भी उनकी
                        जय जयकार लगाती है।
आज मगर वो ही जनता क्यों
                        इनसे आँख चुराती है।।

रक्षा मंत्रालय भी अपना
                         ध्यान हटाये बैठा है।
बस कुछ सीटें MCO में
                         दे हर्षाये बैठा है।।

कदम  रेलवे मंत्रालय क्यों
                        अपने आप उठायेगा।
जब तक कि रक्षा मंत्रालय
                        द्वार न उसके जायेगा।।

दिल्ली में ये खादी वाले
                       देखो कुछ ना बोल रहे।
और ट्रेनों में वर्दी वाले
                       धक्के खाते डोल रहे।।

कुछ तो ऐसे नियम लाओ
                     सुन लो इन मनुहारों को।
कन्फर्म सीट हो सैनिक व
                     इन सैनिक के परिवारों को।।

जान झोंकने वालों का भई
                       इतना तो हक बनता है।
चलो बता दो मेरे मत से
                       सहमत कितनी जनता है ??? ??????????????
……………….

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