बातू गुफाएँ ( Batu caves)

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बातू गुफ़ाओं में अंदर जाने का प्रवेश द्वार, जहाँ मुरुगन की विशाल प्रतिमा खड़ी हुई है

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बातू गुफ़ाएँ मलेशिया के गोम्बैक जिले में स्थित एक चूना पत्थर की पहाड़ी है जिसमें गुफ़ाओं व गुफ़ा मंदिरों की शृंखलाएँ हैं। यह पहाड़ी मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुरसे 13 किलोमीटर (8 मील) दूर है। इसका यह नाम इसे पहाड़ी के पीछे बहने वाली बातू नदी से मिला है, इसके साथ ही पास के एक गाँव का नाम भी बातू गुफ़ा है। यहाँ की गुफ़ाभारत से बहार हिंदुओं का एक बहुत प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, विशेष रूप से तमिल लोगों के लिए। गुफ़ा का मंदिर शिव वपार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित है। यह स्थान मलेशिया में हिन्दुओं द्वारा मनाए जाने वाले त्योहारथाईपुसम का केंद्र बिंदु है।

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यह गुफाओं मेँ जाने का दरवाजा है

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The limestone forming Batu Caves is said to be around 400 million years old. Some of the cave entrances were used as shelters by the indigenous Temuan people

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The Batu Caves serve as the focus of the Hindu community’s yearly Thaipusam festival. They have become a pilgrimage site not only for Malaysian Hindus, but Hindus worldwide, from countries such as India, Australia and Singapore.
 Devotees carry containers containing milk as offering to Lord Murugan either by hand or in huge decorated carriers on their shoulders called ‘kavadi‘.

बाटु केव्स का इतिहास 40 करोड़ वर्ष पुराना है। प्राचीन काल में इन गुफाओं का इस्तेमाल अनेक प्रकार की जनजातियां रहने के लिए करती थी। उस समय भारतीय व्यापारी थम्बुस्वामी पल्लई प्रमुख गुफा के प्रवेश द्वार की बनावट से काफी प्रभावित हुए थे। यह गुफाएं युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अस्त्र भाले के आकार की तरह हैं।

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मुरुगन हैं यहां कुमारा स्वामी

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने अपनी पत्नी उमा( पार्वती) के साथ नृत्य किया था और इसी दिन उनके ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय (मुरुगन स्वामी) को अपनी मां की ओर से दैवीय भाला प्राप्त हुआ था। दुनियाभर में तमिल लोग जहां इन्हें मुरुगन कह कर संबोधित करते हैं वही तेलुगू लोग कुमारा स्वामी के नाम से पूजते हैं।

भगवान कार्तिकेय के हजारों नाम है। थाईपुसम के दिन भगवान मुरुगन की मूर्ति को सुगंधित जल से नहलाया जाता है। उनका श्रृंगार किया जाता है। त्योहार के दूसरे दिन रथ में प्रभु की झांकी निकाली जाती है।
पास ही स्थित एक अन्य गुफा को बैट केव्स नाम दिया गया है। अंधकार से भरी इन गुफाओं में चमगादड़ों को गुफा की ऊंचाइयों पर लटके आसानी से देखा जा सकता है।

गाइड आपको गुफा की प्राचीनता, रख-रखाव के बारे में बताते चलते हैं। एक अन्य गुफा भी है जिसे रामायण केव्स कहा जाता है। यहां हनुमान जी की बड़ी मूर्ति स्थापित की गई है।
मैँ तो इसे ज्यादा आपको नहीँ बता सकता मगर गाइड आपको सब कुछ बताएगा
keshuram Mali
केशुमाली
चित्तौड़गढ़

Posted from keshumali
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