जय बजरंग बली

हे मारुतिऽऽऽऽऽ
हे मारुति सारी राम कथा का सार तुम्हारी आँखों में,
दुनियाँ भर की भक्ति का हैं भंडार तुम्हारी आँखों में ,
हे मारुति सारी राम कथा का सार तुम्हारी आँखों में ,
जै जय जय बजरंगी ,बली, जै जय जय बजरंगी ,बली…
लंका को तुम्ही ने जलाया था , रावण को तुम्हीं हिलाया था
संजवीनी बुटी ला कर के लक्षमण को जिलाया था ,
रहते हैं सदा रघुनन्दनजी साकार तुम्हारी आँखों में ॥ हे मारुतिऽऽऽऽऽ
तुम सचमुच संकट मोचन हो , शंकर की तरह त्रिलोचन हो ,
जिसपर हो तुम्हारी कृपा हो उसे , कभी कष्ट ना हो कभी सोच ना हो ,
चिंता जो काट करके रख दे ,वो तलवार तुम्हारी आँखों में ॥ हे मारुतिऽऽऽऽऽ
हे मारुति सारी राम कथा का सार तुम्हारी आँखों में,
दुनियाँ भर की भक्ति का हैं भंडार तुम्हारी आँखों में, ,
जै जय जय बजरंगी,बली, जै जय जय बजरंगीबली…

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Jai bajrang bali ki jai
He maruti he maruti he maruti sari
Ram katha ka sar tumhari ankho me
He maruti sari ram katha ka
Sar tumhari ankho me
Dunia bhar ki bhakti ka hai
Dunia bhar ki bhakti ka hai
Bhandar tumhari ankho me
He maruti he maruti sari ram
Katha ka sar tumhari ankho me
Jai jai jai bajrang bali,jai jai jai bajrang bali
Jai jai jai bajrang bali, jai jai jai bajrang bali
Lanka ko tumi ne jalaya tha
Jalaya tha, jalaya tha
Rawan ko tumhi ne hilaya tha
Hilaya tha hilaya tha
Sanjiwani buti lakarke
Sanjiwani buti lakarke lakshman ko
Tumhi ne jiraya tha jiraya tha
Jiyaya tha
Rahe priya sada raghnandan ji
Rahe priya sada raghnandan ji
Sakar tumhari ankho me
He maruti he maruti sari ram
Katha ka sar tumhari ankho me
Jai jai jai bajrang bali,jai jai jai bajrang bali
Jai jai jai bajrang bali,jai jai jai bajrang bali
Tum sachmuch sankatmochan ho
Tum sachmuch sankatmochan ho,
Sankatmochan ho
Sankar ki tarah trilochan ho, trilochan ho
Jis par ho tumhari kirpa ue
Jis par ho tumhari kirpa use kabhi
Kast na ho kabhi soch na ho
Chinta ka jo kat ke rakhde wo
Chinta ka jo kat ke rakhde wo
Talwar tumhari ankho me
He maruti he maruti he maruti sari
Ram katha ka sar tumhari ankho me
He maruti sari ram katha ka sar
Tumhari ankho me
Jai jai jai bajrang bali,jai jai jai bajrang bali
Jai jai jai bajrang bali,jai jai jai bajrang bali.

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जरा सोचो

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जीत हासिल करनी हो तो काबिलियत बढाओ,
किस्मत की रोटी तो कुत्तेको भी नसीब होती है.!!

कमाल का हौंसला दिया है 
ऊपर वाले ने हम इंसानों को…
भरोसा अगले पल का नहीं 
🍏और अचार 🍏
पूरे साल के लिए डाल लेते हैं.

“फर्क सिर्फ सोच का होता है
सकारात्मक या 
नकारात्मक…!”
“वरना वही सीढियां होती है
किसी के लिए ऊपर जाती हैं
और किसी के लिए नीचे आती है

मतलब की दुनिया थी इसलिए छोड़ दिया सबसे मिलना,
वरना ये छोटी सी उम्र तन्हाई के काबिल नही थी…!!

आग लगाना मेरी फितरत में नही है.
मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या कसूर!”

क्योंकि

सादगी आत्मा का वस्त्र है ,अच्छे नहीं वो लोग जो इससे त्रस्त है!

अजीब तरह के लोग हैं, इस दुनिया मे
अगरबती भगवान के लिए खरीदते हैं।
और खुशबू खुद की पसंद की तय करते हैं…!!”

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सुख

एक बादशह अपने गुलाम से बहुत प्यार करता था। एक दिन
दोनों जंगल से गुज़र रहे थे ‘ वहां एक वृक्ष पर एक ही फल लगा था
। हमेशां की तरह बादशह ने एक फांक काटकर गुलाम को चखने
के लिये दी । गुलाम को स्वाद लगा उसने धीरे-धीरे सारी
फांक लेकर खा ली ‘और आखरी फांक भी झपट कर खाने लगा
। . बादशह बोला हद हो गई इतना स्वाद ‘गुलाम बोला हाँ
बस मुझे ये भी दे दो । बादशह से ना रहा गया उसने आखरी
फांक मुह में ड़ाल ली— वो स्वाद तो क्या होना था
कडवा जहर था । बादशह हैरान हो गया ‘गुलाम से बोला तुम
इतने कडवे फल को आराम से खा रहे थे और कोई शिकायत भी
नहीं की । गुलाम बोला “जब अनगिनत मीठे फल इन्ही हाथो
से खाये ‘और अनगिनत सुख इन्ही हाथो से मिले तो इस छोटे
से कडवे फल के लिए शिकायत कैसी . मालिक मैंने हिसाब
रखना बंद कर दिया अब तो में इन देने वाले हाथो को ही
देखता हूँ जी ” बादशह की आँखों में आंसू आ गए बादशह ने कहा
इतना प्यार — और उस गुलाम को गले से लगा लिया।

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Moral-
हमे भी परमात्मा के हाथ से भेजे गये दुःख और सुख को ख़ुशी
ख़ुशी स्वीकार करना चाहियॆ कभी इसको लेकर भगवान् से
शिकायत नहीं होनी चाहिय

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग,

शिव पुराण के अनुसार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव का प्रथम ज्योतिर्लिंग है।
यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। ऐसी मान्यता
है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की
थी। पुराणो में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना से सम्बंधित
कथा इस प्रकार है-

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जब प्रजापति दक्ष ने अपनी सभी सत्ताइस पुत्रियों का
विवाह चन्द्रमा के साथ कर दिया, तो वे बहुत प्रसन्न हुए। पत्नी के रूप
में दक्ष कन्याओं को प्राप्त कर चन्द्रमा बहुत शोभित हुए और दक्षकन्याएँ
भी अपने स्वामी के रूप में चन्द्रमा को प्राप्त कर
शोभायमान हो उठी। चन्द्रमा की उन सत्ताइस पत्नियों में
रोहिणी उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय थी, जिसको वे विशेष आदर
तथा प्रेम करते थे। उनका इतना प्रेम अन्य पत्नियों से नहीं था।
चन्द्रमा की अपनी तरफ उदासीनता और
उपेक्षा का देखकर रोहिणी के अलावा बाकी दक्ष पुत्रियां
बहुत दुखी हुई।  वे सभी अपने पिता दक्ष की
शरण में गयीं और उनसे अपने कष्टों का वर्णन किया।
अपनी पुत्रियों की व्यथा और चन्द्रमा के दुर्व्यवहार को
सुनकर दक्ष भी बड़े दुःखी हुए। उन्होंने चन्द्रमा से भेंट
की और शान्तिपूर्वक कहा- ‘कलानिधे! तुमने निर्मल व पवित्र कुल में
जन्म लिया है, फिर भी तुम अपनी पत्नियों के साथ
भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हो। तुम्हारे आश्रय में रहने वाली
जितनी भी स्त्रियाँ हैं, उनके प्रति तुम्हारे मन में प्रेम कम
और अधिक, ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों है? तुम किसी को अधिक प्यार
करते हो और किसी को कम प्यार देते हो, ऐसा क्यों करते हो? अब तक
जो व्यवहार किया है, वह ठीक नहीं है, फिर अब आगे ऐसा
दुर्व्यवहार तुम्हें नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति आत्मीयजनों
के साथ विषमतापूर्ण व्यवहार करता है, उसे नर्क में जाना पड़ता है।’ इस प्रकार
प्रजापति दक्ष ने अपने दामाद चन्द्रमा को प्रेमपूर्वक समझाया और ऐसा सोच लिया
कि चन्द्रमा में सुधार हो जाएगा। उसके बाद प्रजापति दक्ष वापस चले गये।
इतना समझाने पर भी चन्द्रमा ने अपने ससुर प्रजापति दक्ष
की बात नहीं मानी। रोहिणी के प्रति
अतिशय आसक्ति के कारण उन्होंने अपने कर्त्तव्य की अवहेलना
की तथा अपनी अन्य पत्नियों का कुछ भी
ख्याल नहीं रखा और उन सभी से उदासीन रहे।
दुबारा समाचार प्राप्त कर प्रजापति दक्ष बड़े दुःखी हुए। वे पुनः चन्द्रमा
के पास आकर उन्हें उत्तम नीति के द्वारा समझने लगे। दक्ष ने
चन्द्रमा से न्यायोचित बर्ताव करने की प्रार्थना की। बार-बार
आग्रह करने पर भी चन्द्रमा ने अवहेलनापूर्वक जब दक्ष
की बात नहीं मानी, तब उन्होंने शाप दे दिया।
दक्ष ने कहा कि मेरे आग्रह करने पर भी तुमने मेरी
अवज्ञा की है, इसलिए तुम्हें क्षयरोग हो जाय।
दक्ष द्वारा शाप देने के साथ ही क्षण भर में चन्द्रमा क्षय रोग से
ग्रसित हो गये। उनके क्षीण होते ही सर्वत्र हाहाकार मच
गया। सभी देवगण तथा ऋषिगण भी चिंतित हो गये। परेशान
चन्द्रमा ने अपनी अस्वस्थता तथा उसके कारणों की सूचना
इन्द्र आदि देवताओं तथा ऋषियों को दी। उसके बाद उनकी
सहायता के लिए इन्द्र आदि देवता तथा वसिष्ठ आदि ऋषिगण ब्रह्माजी
की शरण में गये। ब्रह्मा जी ने उनसे कहा कि जो घटना हो
गई है, उसे तो भुगतना ही है, क्योंकि दक्ष के निश्चय को पलटा
नहीं जा सकता। उसके बाद ब्रह्माजी ने उन देवताओं को
एक उत्तम उपाय बताया।
ब्रह्माजी ने कहा कि चन्द्रमा देवताओं के साथ कल्याणकारक शुभ
प्रभास क्षेत्र में चले जायें। वहाँ पर विधिपूर्वक शुभ मृत्युंजय-मंत्र का अनुष्ठान
करते हुए श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना करें। अपने सामने
शिवलिंग की स्थापना करके प्रतिदिन कठिन तपस्या करें।
इनकी आराधना और तपस्या से जब भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाएँगे,
तो वे इन्हें क्षय रोग से मुक्त कर देगें। पितामह ब्रह्माजी
की आज्ञा को स्वीकार कर देवताओं और ऋषियों के
संरक्षण में चन्द्रमा देवमण्डल सहित प्रभास क्षेत्र में पहुँच गये।
वहाँ चन्द्रदेव ने मृत्युंजय भगवान की अर्चना-वन्दना और अनुष्ठान
प्रारम्भ किया। वे मृत्युंजय-मंत्र का जप तथा भगवान शिव की उपासना
में तल्लीन हो गये। ब्रह्मा की ही आज्ञा के
अनुसार चन्द्रमा ने छः महीने तक निरन्तर तपस्या की और
वृषभ ध्वज का पूजन किया। दस करोड़ मृत्यंजय-मंत्र का जप तथा ध्यान करते हुए
चन्द्रमा स्थिरचित्त से वहाँ निरन्तर खड़े रहे। उनकी उत्कट तपस्या से
भक्तवत्सल भगवान शंकर प्रसन्न हो गये। उन्होंने चन्द्रमा से कहा- ‘चन्द्रदेव!
तुम्हारा कल्याण हो। तुम जिसके लिए यह कठोर तप कर रहे हो, उस
अपनी अभिलाषा को बताओ। मै तुम्हारी इच्छा के अनुसार
तुम्हें उत्तम वर प्रदान करूँगा।’ चन्द्रमा ने प्रार्थना करते हुए विनयपूर्वक कहा-
‘देवेश्वर! आप मेरे सब अपराधों को क्षमा करें और मेरे शरीर के इस
क्षयरोग को दूर कर दें।’
भगवान शिव ने कहा– ‘चन्द्रदेव! तुम्हारी कला प्रतिदिन एक पक्ष मेंक्षीण हुआ करेगी, जबकि दूसरे पक्ष में प्रतिदिन वह
निरन्तर बढ़ती रहेगी। इस प्रकार तुम स्वस्थ और लोक-
सम्मान के योग्य हो जाओगे। भगवान शिव का कृपा-प्रसाद प्राप्त कर चन्द्रदेव
बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने भक्तिभावपूर्वक शंकर की स्तुति
की। ऐसी स्थिति में निराकार शिव उनकी दृभक्ति को देखकर साकार लिंग रूप में प्रकट हुए और संसार में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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दोस्त

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दोस्तों की कमी को पहचानते हैं हम
दुनिया के गमो को भी जानते हैं हम
आप जैसे दोस्तों का सहारा है
तभी तो आज भी हँसकर जीना जानते हैं हम

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